: पूज्यभाई श्री की मुंबई कथा 3 day


*।।श्री हरि:।।*


*चिंतन धारा*



*पूज्य भाईश्री की वाणी*


*ठाकुर जी का दर्शन कैसे करना चाहिए*

भगवान् के सामने आँख मूँद के खड़े हो जाते हैं
निहारो, ठाकुरजी को निहारो। चरण से लेकर मुख पर्यन्त और मुख से लेकर चरण पर्यन्त। बार-बार छवि को निहारो।
जरुरी नहीं कि १०-२० मंदिरों में जाए, एक जगह दर्शन करो लेकिन निहारो और
जब प्रेमपूर्वक ठाकुरजी को आप निहारने लग जाएंगे तो मंदिरों में ही नहीं आप के घर के ठाकुरजी में ही आपको विविध अनुभूतियाँ होने लगेगी !
कभी लगेगा हमारे ठाकुरजी आज थोड़े गंभीर हैं, कभी लगेगा आज थोड़े अनमने से हैं, कभी लगेगा नजर से नजर तो मिलती है लेकिन वे शरमा रहे हैं। और फिर तन्मयता बढ़ेगी तो वे बातचीत भी करने लगेंगे !

*day 3*

*mumbai katha*

*22.11.2019*

*pujya bhaishree*
 
: गिरीश भाई : 24-11-2019